घरेलू उपाय प्रेगनेंसी टिप्स

प्रेगनेंसी क्या है और शुरुआती लक्षण क्या है, प्रेगनेंसी कैसे रोक सकते हैं

महिलाओं को कई बार अपने प्रेग्नेंट होने का पता नहीं चलता है। महिलाएं अपने आने वाले पीरियड के समय पर नहीं होने के कारण कई बार चिंता में पड़ जाती है। हालांकि महिला द्वारा किसी भी तरह का सेक्स नहीं करने पर भी महिलाओं के पीरियड्स में बदलाव हो सकते हैं। यदि किसी महिला या पुरुष पुरा सेक्स करने के बाद महिला को लगता है कि वह प्रेग्नेंट है या हो सकती है तो उसके कुछ शुरुआती लक्षण महिला को दिख जाते हैं। जिससे महिला पता कर सकती है कि वह प्रेग्नेंट है या नहीं। pregnant hai ki nahin

महिला का समय पर पीरियड्स नहीं होना हारमोंस की कमी के कारण भी हो सकता है परंतु यदि महिला के सेक्स करने के बाद पुरुष का स्पर्म महिला की योनि में रह जाता है तो महिला को प्रेग्नेंट होने का डर रहता है इसके लिए हमने नीचे सभी जानकारियां दी है ताकि महिला को पता चल सके कि प्रेग्नेंट किस समय होता है तथा प्रेगनेंसी होने के क्या क्या लक्षण हो सकते हैं।

घरेलू तरीकों से जानें प्रेग्नेंट हैं या नहीं

प्रेगनेंसी क्या है? (Pregnancy Kya Hota Hai)

प्रेगनेंसी एक प्रक्रिया है जिसमें पुरुष और स्त्री के सेक्स के बाद आदमी के द्वारा महिला की योनि में अपने शुक्राणु डालना है शुक्राणु स्त्री के अंडाणु को प्रभावित। यह प्रभावित करने की प्रक्रिया के बाद स्त्री के गर्भ में शुक्राणु जगह बना लेता है और एक निश्चित समय के बाद बच्चे का जन्म होना शुरू हो जाता है आमतौर पर इसे 40 हफ्तों की प्रक्रिया मर जाता है।

प्रेगनेंसी को आमतौर पर तीन भागों में बांटा गया है पहला 12 सप्ताह से दूसरा तेरा सप्ताह से 28 सप्ताह तीसरा 28 सप्ताह से अधिक समय यह समय महिला को बहुत सावधानी से रहना होता है।

प्रेगनेंसी कब होती है? (Pregnancy Kab Hoti Hai in Hindi)

अगर महिला प्रेगनेंसी का प्रयास करते हैं तो उन्हें पता होना चाहिए कि प्रेगनेंसी कब होती है कहीं बाहर महिलाओं पुरुष को पता नहीं होने के कारण सेक्स के दौरान पता ही नहीं चलता कि कब महिला प्रेग्नेंट हुई या नहीं। यदि महिला को प्रेगनेंसी से बचना है तो उसे पता होना चाहिए कि प्रेगनेंसी कब होती है चलिए जानते हैं।

महिला के पीरियड्स चार-पांच दिन तक ही रहता है अगले छे दिन बाद बिल्डिंग होना बंद हो जाती है। परंतु ब्लीडिंग बंद होने का कारण यह नहीं है कि महिला प्रेग्नेंट नहीं हो सकती हैं। महिला के पीरियड्स खत्म होने के बाद 11 दिन तक संभोग यानी कि सेक्स नहीं करना होगा 11 दिन के दौरान महिला का प्रेग्नेंट होना हो सकता है।

नेक्स्ट महीने के पीरियड आने से पहले 14 दिन पहले ओवुलेशन की प्रक्रिया होती है ओवुलेशन के दिन और पीरियड्स के 5 दिन का समय जो होता है वह महिला के प्रजनन क्षमता को तेज कर देता है जो प्रेग्नेंट होने का खतरा हो सकता है तो इन दिनों में सेक्स करने से बच सकता है।

भ्रूण का विकास कैसे होता है।

महिला की प्रेग्नेंट होने पर उसकी भ्रूण में विकास होना शुरू हो जाता है। महिला के भ्रूण में 10 सप्ताह की प्रेगनेंसी के समय यह होता है इसके बाद में गर्भपात का खतरा खत्म हो जाता है इस दौरान भ्रूण की लंबाई 30 मी मी होती है।

इसके लिए अल्ट्रासाउंड से दिल की धड़कन एवं अन्य गतिविधियों को महसूस कर सकते हैं भ्रूण चरण के दौरान संरचना का जल्द ही बदलाव होता है शरीर प्रणाली में विकास होता है। भ्रूण का विकास दोनों वजह में और वजन और लंबाई में गति हो सकते हैं। महिला पर पहले और पांचवें और 36 सप्ताह के बीच दिमाग पर n11 दिमाग की गतिविधियों पर असर पड़ता है।

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या है? (Pregnancy ke suruati lakshan kya hote hai)

किसी भी महिला के प्रेग्नेंट होने के बाद उसकी प्रेग्नेंट होने का निश्चित परिणाम कुछ उसके यार में बदलाव से पता चल जाता है। महीना के प्रेग्नेंट होने पर उसमें आमतौर से कुछ लक्षण दिखाई देना संभव है। यह लक्षण महिला के प्रेगनेंसी का पता लगाते हैं। चलिये जानते है की प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या क्या हो सकते है।

व्यवहार में बदलाव

प्रेगनेंसी के लक्षण में यह होना आम बात है यदि कोई महिला प्रेग्नेंट है तो उसके व्यवहार में बदलाव जरूर आते हैं। प्रेग्नेंसी के समय खून में एस्ट्रोजन और progesterone की मात्रा बढ़ जाती है जिसके कारण शरीर के हारमोंस तेजी से बढ़ने लगते हैं। हारमोंस के तेजी से बढ़ने के कारण महिला के व्यवहार पर भी असर पड़ता है।

प्रेग्नेंसी के समय महिला अच्छे और बुरे दोनों तरह की भावना को महसूस करता है। वह सामान्य तौर पर उदास परेशान दिखाई देती है। प्रेग्नेंट महिला को यदि इस तरह की परेशानी हो या कुछ बुरा भला करने का मन करे तो इसके लिए वह अपने डॉक्टर से बात कर ले ताकि आप कोई गलत कदम ना उठा सके।

थकान महसूस होना

प्रेग्नेंसी के लक्षण में महिला को थकान महसूस होने का आभास होता है। इसके होने का कारण बच्चे को सहारा देने के लिए खुद को पूर्ण रूप से तैयार करने से होता है। इस समय आपको थकान महसूस हो सकती है। प्रेगनेंसी के इस लक्षण में महिला को खासतौर से अधिक बैठना और सोना पसंद आता है। वह बार-बार लेटना और बैठना पसंद करती है।

महिला के शरीर में प्रेगनेंसी के हारमोंस उसके लिए जिम्मेदार होता है यह हार्मोन आपको बार-बार थकान परेशान और भावुक कर सकता है। थकान का होना एक निश्चय लक्षण नहीं हो सकता है या आमतौर पर भी आ सकता है। प्रेगनेंसी में यह लक्षण आम है परंतु पहली और तीसरी तिमाही में सबसे ज्यादा थकान होने से आप बहुत प्रभावित होंगी।

स्तन का सूजन

Pregnancy के समय महिला के स्तन में बदलाव हो सकते हैं यानी कि महिला के स्तन बड़े सूजे हुए और बड़े लग सकते हैं। स्तन की त्वचा पर मेरी नशा देखी जा सकती है यह परेशानी खासतौर से पहले तिमाही में ही सबसे आम है जैसे-जैसे प्रेगनेंसी का समय बढ़ता जाता है यह होना बंद हो जाता है।

इसकी होने का कारण प्रेगनेंसी के दौरान हार्मोन स्तनों में रक्त आपूर्ति तेजी से बढ़ा देता है। इस दौरान आपके निप्पल के आसपास सनसनाहट सी महसूस होने लगती है। स्तन में सूजन होना प्रेगनेंसी का पहले लक्षण में से एक हो सकता है यह आपको पहले दिखाई दे जाएगा। कभी-कभी आपको स्तनों में बदलाव 1 सप्ताह के अंदर ही बिक जाता है जिससे आपको प्रेगनेंसी का पता चल जाता है। जैसे-जैसे शरीर में हारमोंस बढ़ता जाता है आपको इसका आभास होना कम हो जाता है। आपको प्रेगनेंसी में पहुंचा पर कुछ बदलाव भी देखने को मिल सकती है।

उल्टी आना और जी मचलना

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों में महिला का जी मचल सकता है यह प्रेगनेंसी का एक आम लक्षण है। यह ज्यादातर प्रेगनेंसी महिला को 6 सप्ताह के अंदर शुरू हो जाता है कभी-कभी 4 सप्ताह से पहले ही शुरू हो सकता है। जी मचलने के साथ-साथ महिला को प्रेगनेंसी के दौरान उल्टी भी हो सकते हैं जिससे पता चलता है कि आप प्रेग्नेंट है। यह आपको सुबह दिन-रात किसी भी वक्त आ सकती है जब आपका जी मचलना शुरू होगा तो आपको उल्टी हो सकती है।

महावारी नहीं आना

प्रेगनेंसी के शुरुआती समय में महावारी नहीं आती है जिससे पता चलता है कि महिला प्रेग्नेंट है। यदि महिला को लगता है वह प्रेग्नेंट है और महावारी का समय निश्चित नहीं हो पा रहा तो महिला प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती है। महावारी का समय चूकना प्रेगनेंसी का संकेत है।

जब महिला को महावरी का समय फिक्स नहीं होता या आने वाली माहवारी का समय पता नहीं होता तो आपको महावारी देर से आने का एहसास नहीं होगा। इस समय महिला को बेचैनी स्तन में बदलाव बार-बार पेशाब आना होने के लक्षण दिखाई देंगे जो महिला के प्रेग्नेंट के शुरुआती लक्षण में से आम है।

महावारी के समय खून में हल्के धब्बे भी आ सकते हैं। महिला को पेशाब करते समय हल्के गुलाबी या भूरे रंग के धब्बे देखने को मिल जाता है इसके अलावा कई बार हल्का सा परेशानी महसूस होती है।

विशेषज्ञ के अनुसार प्रेगनेंसी के शुरुआती में खून में धब्बे आते हैं इसका कारण गर्भाशय में डिंब को प्रभावित होना या महावारी को नियंत्रण करने वाले हार्मोन में हलचल होने के कारण हो सकती है। ऐसा होना अपरा की वजह से हो सकता है। यदि इस परेशानी का सामना महिला करती है तो उसे रक्तस्राव के बाद अपने डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।

शरीर में उच्च बेसन तापमान का बढ़ना

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने शरीर में तापमान में परिवर्तन दिखाई देंगे तो महिला को समझ आ जाएगा कि वह प्रेग्नेंट है। प्रेगनेंसी के 18 दिन तक लगातार शरीर में बेसिल का तापमान बढ़ता रहेगा। यह तापमान प्रेगनेंसी के दौरान पूरे समय तक बड़ा हुए ही रहेगा।

बार-बार पेशाब आना

प्रेगनेंसी की सूरत लक्षणों में आपको बार-बार पेशाब आने का लक्षण दिखाई देगा यह सामान्य तौर से अधिक बार होगा। यह इस कारण होता है क्योंकि शरीर में बहुत से हार्मोन के मिश्रण आपके शरीर में खून को अधिक मात्रा में बढ़ा देते हैं और गुर्दे के ज्यादा मेहनत करने के कारण होता है।

यदि महिला को पेशाब करते हुए जलन या दर्द होता है तो लिंग संक्रमण  यानी कि यूटीआई हो सकता है इसके लिए महिला को तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

खाने का मन नहीं करना

प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में महिला को किसी तरह की चीज खाना अच्छा नहीं लगता जिससे उन्हें किसी भी चीज इस्माइल पसंद नहीं आती। महिला खाने को देखकर या उसकी स्माइल सूंघने से बदबू आने लगती है जिससे उसे उल्टी या जी मचल। कहीं बाहर महिला को सूरत इलेक्शन के दौरान खट्टा खाने का मन ज्यादा करता है।

प्रेगनेंसी कैसे रोक सकते हैं। (Pregnancy Ko Kaise Rok Sakte Hain)

महिला अपनी pregnancy को रोक सकती है यदि सेक्स के दौरान कुछ चीजों का ध्यान रख जाए तो महिला प्रेग्नेंट बता सकती है। साथ साथ कुछ उपाय भी बताए गए हैं जिनका ध्यान रखना होगा ताकि महिला प्रेग्नेंट ना हो।

कंडोम का इस्तेमाल

प्रेगनेंसी रोकने के लिए सबसे अच्छा तरीका है व्यक्ति कंडोम का इस्तेमाल करें। कंडोम का इस्तेमाल सबसे सुरक्षित तरीका है सफल और सुविधाजनक भी है इससे व्यक्ति सेक्स का आनंद भी ले सकता है और प्रेग्नेंसी से भी बच सकता है। यदि व्यक्ति के सेक्स करने की इच्छा हो और महिला मां नहीं बनना चाहती तो उसे कंडोम का इस्तेमाल करते होना चाहिए।

वीर्य पात रोक कर

यदि महिलाओं को सेक्स के दौरान प्रेग्नेंट होने से बचना है तो पुरुष को sperm को महिला की योनि में जाने से रोकना होगा। जिसके लिए पुरुष को सेक्स के दौरान जैसे ही वीर्य के आने का एहसास होता है तो उसे अपने लिंग को योनि से बाहर निकाल लेना चाहिए ताकि योनि में वीर्य ना जा सके और महिला प्रेग्नेंट होने से बच सकें। हालांकि कभी-कभी यह करना मुश्किल हो जाता है क्योंकि पुरुष इतना जोश में होता है कि वीर्य अंदर ही निकाल देता है जिसे प्रेग्नेंट होने का खतरा बढ़ जाता है।

गर्भनिरोधक उपाय से

गर्भनिरोधक यानी की प्रेग्नेंसी रोकने के लिए डॉक्टर एक माचिस के तीली की तरह छोटी सी रोड आपकी हाथ में डालता है जिससे आप 4 साल तक प्रेग्नेंट होने से बच सकते हैं। यह रोड शरीर में ऐसा आदमी पैदा करती है जिससे महिला प्रेग्नेंट नहीं हो सकती यदि महिला का इन 4 साल में प्रेग्नेंट या बच्चा पैदा करने की इच्छा होती है तो डॉक्टर की मदद से इस रोड को हाथ से निकलवा सकती है।

गर्भनिरोधक गोलियां

महिला अपने प्रेगनेंसी को रोकने के लिए कुछ गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल कर सकती है ताकि प्रेग्नेंट हो सके हालांकि यह दवाइयां हानिकारक हो सकती है परंतु यह एक असरदार उपाय है। महिला को गर्भ निरोधक गोली लेने से पहले एक बार रोग विशेषज्ञ को को दिखा देना चाहिए या उनके सलाह ले लेनी चाहिए।

प्रेग्नेन्सी रोकने के घरेलू उपाय