घरेलू उपाय प्रेगनेंसी टिप्स

Ovulation के बारे में जाननें के तरीके

हर महीने बिना किसी सुरक्षा के किसी भी कपल के गर्भवती होने के 20 प्रतिशत संभावनाएं होती हैं । ये एक बहुत अच्छा परसेंटेज है क्योंकि ऐसा केवल ओवुलेशन के दौरान ही हो सकता है ।

 ओवुलेशन /Ovulation

ओवुलेशन महीने का वो समय होता है (12 से 24 घंटे) जब अंडे वीर्य या स्पर्म के साथ मिलने को तैयार होता है ।इसमें अंडे अन्डकोशों से ऋतुचक्र के समय निकलते हैं। इस ऋतुचक्र को समझने से ही आप समझ पाएंगे की ओवुलेशन कब होगा। हर महीने एक महिला के अंडकोष से 15 से 20 अंडे निकलते हैं। ये अंडे फैलोपियन ट्यूब से होते हुए गर्भाशय तक पहुँचते हैं। मदर लैप IVF सेंटर दिल्ली में medical डायरेक्टर और IVF विशेषज्ञ डॉ शोभा गुप्ता बताती हैं की ‘ एक महिला के केप्रेगनंट न होने के पीछे ओवुलेशन का बहुत बड़ा रोल होता है। फर्टिलिटी कम होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे थाइरोइड, PCOS या PID आदि ।

ओवुलेशन का गर्भ पर असर

अगर आप प्रेगनंट होना चाहती हैं तो आपको अपने ओवुलेशन चक्र के बारे में पता होना जरूरी है -:

  • आपको गर्भवती होने के लिए आपके अंडे को स्पर्म से मिलना होता है फैल्लोपियन ट्यूब में। लेकिन अंडे केवल 24 घंटे ही जीवित रहते हैं इसलिए जरूरी है की दोनों समय पर मिएँ ।
  • अच्छी बात ये है की स्पर्म करीब 7 दिन तक जीवित रहते हैं इसलिए सम्भोग के लिए जरुरी नहीं है की जल्दीबाजी की जाए आपके पास पुरे 6 दिन होते हैं ।

याद रखिये की गर्भवती के लिए आपके पास ओवुलेशन के दौरान 5 दिन का समय होता है। अगर आप इस दौरान सेक्स करें तो अंडे और स्पर्म के मिलने से आप बड़ी आसानी से प्रेगनंट हो सकती हैं।

अपनी प्रजनन क्षमता को जांचें

तो अब तक आपको पता लगा गया होगा की ओवुलेशन चक्र को समझ लेने से आपके गर्भवती होने की समभावना बढ़ जाती हैं। अब सवाल ये है की आपको पता कैसे लगे की की आपके शरीर में अब सवाल ये है की आपको पता कैसे लगे की आ की शुरुवात हो गयी है, इसके कुछ तरीके हैं -:

सबसे बेहतर तरीका है की आप अपने ऋतुचक्र की अवधि को नोट कर लें । इसके बाद अपने शरीर के हॉर्मोन में बदलाव दीखान एवाले संदेशों को नोट करें । मान लीजिये की आपमें 28 दिन का चक्र होता है तो आप इस चक्र के पहले दिन को ही अपना पहला दिन मानें । आपके गर्भवती होने के समभावना अगले 12 से 17 दिनों तक रहेगी। लेकिन अगर आप ऋतुचक्र तय नहीं है तो हो सकता है की इसमें कुछ दिन आगे या पीछे हो जाएँ ।

अगर फिर भी आपको समझने में परेशानी हो रही है तो इन नियमों का पालन करें ।

कैलेंडर का इस्तेमाल करें

ओवुलेशन ज्यादातर 28 दिन के ऋतुचक्र के बीच में होता है। ये दिन पहले पीरियड के पहले दिन से दुसरे पीरियड के पहले दिन तक गिना जाता है। हालाँकि ये चक्र साधारण और सामान्य है लेकिन इसमें भी बदलाव ही सकते हैं ।

अपने शरीर को समझें

अगर आप अपने शरीर को अच्छे से जानती और समझती हैं तो आपको ओवुलेशन का भी पता लग जाएगा . ऋतुचक्र के कुछ दिन पहले आपको अपने पेट के निचले हिस्से में दर्द का अनुभव होने लगता है . इसी तरह जब अंडाशय से अंडे निकलते हैं तब भी शरीर को अच्छे से पता लग जाता हिया अगर आप अपने शरीर को जानने की कोशिश करें तो . इसे ‘मिडिल पेन” कहते हैं .

अपने शरीर के तापमान पर नज़र रखें

दूसरी चीज़ जो अओके शरीर में ओवुलेशन होने का संकेत देता है वो है आपके शरीर का बेसल तापमान यानी BBT . इसकी जांच बेसल बॉडी थर्मामीटर से की जाती है वो भी सुबह सुबह . आप देखेंगे की चक्र के पहले हिस्से में एस्ट्रोजन लेवल बढ़ जाता है . इससे शरीर का तापमान साधारण से भी कम हो जाता है .दुसरे हिस्से में प्रोजेस्टेरोन का लेवल बहुत अधिक हो जाता है जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है . अगर आप इस गणित को ध्यान से देख्नेगे तो आप अपने ओवुलेशन के समय को अच्छे से समझ पाएंगे . डॉ गुप्ता बताती हैं “शरीर का तापमान ओवुलेशन के दौरान करीब आधा देस्ग्री बढ़ जाता है और इसकी नियमित जांच और समझ से आप अपने गर्भवती होने का बेहतरीन समय पता कर सकते हैं .

अपने ग्रीवा यानी सर्विक्स को समझें

अपने ओवुलेशन के बारे में जानने का ये भी एक बेहतरीन तरिका है। चक्र के शुरू में ग्रीवा यानी (योनी और गर्भाशय के बीच का रास्ता) थोड़ी सख्त, नीची और बंद होती है। लेकिन ओवुलेशन की शुरुवात होते ही यह खुल जाती है और मुलायम हो जाती है ताकि वो स्पर्म को अपने अन्दर समेत सके। अगर आप अपने ग्रीवा की जांच रोज करें तो आप व् की शुरुवात को समझ सकती हैं। अपने पीरियड के खत्म होने के बाद वो जगह फॉर से सख्त हो जाती है ।

एक ओवुलेशन किट खरीद लें

ओवुलेशन किट आपके सटीक ओवुलेशन के समय का पता लगाने में सक्षम हिते हैं और आपको गर्भवती होने के सगतिक समय की जानकारी दे देते हैं। ये किट आपके शरीर में लुतेइनिज़िन्ग हॉर्मोन की मात्रा को पता लगता है। आपको बस इस किट में दिए गए एक टूल पर पेशाब करना होता है और आपको जानकारी मिल जाती है। डॉ गुप्ता के मुताबिक “ भारत में आजकल ऐसे कई किट मौजूद हैं जैसे आई नो, प्रेगान्यूज़, आई स्योर, आदि ।

थूक की जांच

आप इस जांच को भी अमल में अला सकते हैं। इससे आपके शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा का पता चलता है। ये एक किफायती तरिका है। अगर आप अपने थूक को किसी माइक्रोस्कोप में देखें तो अगर आपको फ़र्न जैसा एक आकार दिखाई देता है इसका मतलब है की आपना ओवुलेशन शुरू हो गया है ।

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