घरेलू उपाय

तीन औषधियां जो हर संक्रमण से बचाती है

आयुर्वेदिक चिकित्सा से हमारे ऋषि-मुनियों ने कई बड़ी- बड़ी बीमारियों का अच्छी तरह उपचार किया है। यानी ऐसी अनेक गंभीर बीमारियां हैं, जिनका उपचार आयुर्वेदिक दवाओं से संभव है। कोरोना वायरस के इस काल में जब पूरी दुनिया तमाम प्रयोग कर संक्रमण से लड़ने के आधुनिक इलाज ढूंढने में सफल नहीं सकी तो भारतीय संस्‍कृति और चिकित्‍सा पद्धती की ओर मुड़ी है। भारत के सदियों पुराने आयुर्वेद का डंका अब पूरी दुनिया में बज रहा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा बताए गए उपाय कारगर साबित हो रहे हैं।

लोग एनर्जी ड्रिकं के रूप में काढ़े का सेवन कर रहे हैं। आयुष मंत्रालय द्वारा कोरोना से जंग में तीन प्रमुख औ‍षधियों को आधार बताया गया है। ये तीन औषधियां हैं अश्‍वगंधा, मुलेेठी और गिलोय। आयुर्वेद और आहार विशेषज्ञ मनोज वर्मा के अनुसार हमारे देश में तीनों चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से कोरोना के इलाज की संभावना पर तेजी के साथ शोध चल रहा है। पिछले दिनों भारत सरकार ने कोरोना की दवा के तौर पर अश्वगंधा, गिलोय और मुलैठी का क्लीनिकल ट्रायल की इजाजत दे दी है।

आयुर्वेद करती है बीमारी को जड़ से खत्‍म

विशेषज्ञ के अनुसार आयुर्वेद चिकित्सा सिर्फ बीमारियों को ही ठीक नहीं करती, बल्कि यह मनुष्य को जीवन जीने की कला भी सिखाती है। आयुर्वेद चिकित्सा प्रकृति का अनमोल तोहफा है। हजारों वर्षों से चली आ रही आयुर्वेद की चिकित्सा मनुष्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनाई जाती है। एलोपैथिक चिकित्सा से बीमारियों में तुरन्त आराम तो मिलता है, लेकिन यह निश्चित नहीं होता कि बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जाएगी। लेकिन अगर बात आयुर्वेद चिकित्सा की है, तो यह निश्चित होता है कि यह रोग के कारण को समझकर उस बीमारी को जड़ से खत्म करने में सक्षम होती है और फिर वह बीमारी दोबारा नहीं होती।

अश्वगंधा

आय़ुष मंत्रालय ने अश्वगंधा का कोरोना की दवा के रूप में ट्रायल शुरू कर दिया है। अथर्ववेद में भी अश्वगंधा के बारे में बताया गया है। यह बैक्टीरिया के संक्रमण में लाभ देता है। इसके अलावा, घाव भरने में उपयोगी और प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ाने में मददगार होता है। यह मधुमेह में दवा के रूप में लाभदायक होता है। इससे थायराइड की समस्या भी समाप्त होती है। अश्वगंधा मांसपेशियों में शक्तिवर्धक ताकत बनाता है और सुधार भी करता है। अश्वगंधा में अवसाद में असरदायक और इसमें तनाव विरोधी गुण पाए जाते हैं।

कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी में बहुत असरकारी है अश्वगंधा का इस्तेमाल। कई रिसर्च में यह बताया गया है कि अश्वगंधा कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है और कैंसर के नए सेल्स नहीं बनने देता। महिलाओं में सफेद पानी की वजह से उनका शरीर कमजोर होने लगता है। जिसका असर उनके गर्भाशय में भी पडता है। लेकिन अश्वगंधा के सेवन से महिलाओं को इस रोग से निजात मिल सकती है। अश्वगंधा का इस्तेमाल आपकी आंखो की रोशनी को बढ़ाने का काम करता है। रोज दूध के साथ लेंने से आंखो के अलावा स्ट्रेस से भी बचा जा सकता है।

मुलेेठी

आयुष मंत्रालय मुलेठी को भी कोरोना के इलाज में प्रयोग कर रहा है। इसपर क्लीनिकल ट्रायल किया जा रहा है। मुलेठी का वानस्पतिक नाम ग्लयसयररहीज़ा ग्लबरा प्रपात है। यह अब तक गला खराब, पेट संबंधी समस्याओं आदि में इस्तेमाल किया जाता है। लीकोरिस रूट यानी मुलेठी को मीठी जड़ के रूप में भी जाना जाता है। यह एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, प्रोटीन, वसा, कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड के गुणों से भरपूर होती है। इसका इस्तेमाल घाव के उपचार, दमा, आंखें, मुंह, और गले के रोगों के उपचार के लिए सदियों से किया जा रहा है। मुलेठी में विटामिन बी और विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है। साथ ही यह फास्फोरस, कैल्शियम, कोलीन, आयरन, मैग्निशियम, पोटेशियम, सिलिकॉन और जिंक का भी अच्छा स्रोत है। मुलेठी सांस संबंधी बीमारियों, पाचन रोगों, सर्दी-खांसी, कफ, गले और यूरिन इन्फेक्शन की समस्या को भी जड़ से खत्म करने के लिए उपयोगी है।

गिलोय

गिलोय का क्लीनिकल ट्रायल भी कोरोना के इलाज के लिए किया जा रहा है। इसका भी आयुर्वेद में काफी महत्व है। गिलोय का इस्तेमाल बुखार उतारने में किया जाता है। इसके अलावा यह सैकड़ों तरह की बीमारियों को दूर करता है जैसे एसिडिटी, कफ की बीमारी, डायबिटीज की बीमारी, ह्रदय संबंधी बीमारी, कैंसर, आंखों संबंधी रोग, कब्ज, टीबी, हिचकी, कान, बवासीर, पीलिया रोग, लीवर विकार, मूत्र रोग, गठिया, फाइलेरिया आदि बीमारियों में उपचार के लिए भारत में गिलोय का इस्तेमाल किया जाता है।  

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